Saturday, March 17, 2018

शतवादिनी मंदिर और 4 अंजान दोस्त (Shatvadani Temple & 4 Unknown Friends)

17 फरवरी 2018
बहुत साल पहले की बात है जब मैं फेसबुक के द्वारा अरुण जसरोटिया से मिला था । फिर सिलसिला शुरू हुआ और हमने साल 2014 में चादर (द फेमस वन) जाने का प्लान बनाया, दोनो ही नहीं जा पाए अपनी-अपनी समस्याओं के चलते । कई बार मिलने के प्लान बने, नहीं मिले, फिर आख़िरकार ऐ.जे. ने खुद ही पहल करी और 16 फरवरी को बीड में कदम रखा । हमने शतवादिनी मंदिर तक ट्रेक किया जिसके बाद वो वापस जम्मू रवाना हो गया ।

Sunday, March 11, 2018

विंटर ट्रैकिंग : कमरुनाग-शिकारी देवी-जंजैहली (Winter Trekking : Kamrunag-Shikari Devi-Janjhaili)

1 फरवरी 2018
कल रात चूहों ने स्लीपिंग बैग में घुसने के अलावा बाकी सब किया । हम 2 हैं, जनवरी का आखिरी दिन है, शिकारी तक पहुंचने के लिए कमर तक बर्फ में डूबना होगा, शिकारी शाम को पहुंचते हैं । सराय है, पर पानी नहीं है, तो बर्फ पिघलाते हैं । बाहर हवा जमी हुई बर्फ को उखाड़ रही है । आगे के रास्ते को लेकर दुविधा है, 2-3 बार गलत रास्ता लेते हैं, बर्फ ही बर्फ है । उतराई है, जैसे-तैसे बूढा केदार पहुंचते हैं, जंजैहली से बस, बस से एक्टिवा और अंत में रात 10 बजे बीड़ । विंटर एडवेंचर पूरा हुआ ।

Thursday, March 8, 2018

विंटर ट्रैकिंग : रोहांडा से कमरुनाग झील (Winter Trekking : Rohanda to Kamrunag lake)

30 जनवरी 2018
“31 जनवरी को स्पेशल मून निकलने वाला है, तो जालसू पर धावा बोलने को तैयार रहना”, बोलकर रॉकी ने फ़ोन काट दिया । गूगल ने बताया कि “यह चंद्रग्रहण है और इस दौरान ऐसी स्थिति बनेगी जब मून, मून न होकर सूपर मून और फिर ब्लू मून में परिवर्तित होता दिखेगा । इस आकाशीय घटना को ‘सूपर ब्लू मून’ कहा जाता है” । वैसे इसे “कयामत की रात” नाम देना भी गलत न होगा ।

Thursday, January 18, 2018

डायरी 2017 की (Diary of 2017)

मेरा नाम ‘रोहित कल्याणा’ है और क्रेजी लोगों में ‘बाबा’ नाम से फेमस हूँ । पिछले कई सालों से पहाड़ों में पाया जाता हूँ मुख्यत: 2013 के बाद से । 2017 गुजर चुका है, सोच रहा हूँ आज इसका पिंड दान कर दूं इस पोस्ट के द्वारा । 2017 की मुख्य उपलब्धियां थी : 4231 रूपये खर्च करके कुल 59 दिन घुमक्कड़ी जिसमें 357 किमी. ट्रैकिंग, 5400 मी. पर कैम्पिंग, 17 दर्रे (माउंटेन पास) और 10 पर्वतीय झीलें के दर्शन शामिल हैं । 

Sunday, January 14, 2018

झलकियाँ बलेनी की (Glimpses of Baleni)

पिछले भागों में आपने पढ़ा कि कैसे हमने बीड़ से धर्मशाला पहुंचकर वहां से बलेनी पास की ओर अपनी यात्रा शुरू करी । किसी ज़माने में चित्रहार आता था जिसमें टॉप 10 गानों दिखाए जाते थे और हर बार टॉप गाने से पहले पिछले 9 गानों की झलकियाँ पेश की जाती थी सैम टू सैम वही मैं करने वाला हूँ । फर्क इतना है कि मैं यहाँ इस ट्रेक के फोटो पेश करूंगा बाकी आपकी मर्जी है कि कौनसा नम्बर वन है 

Saturday, January 13, 2018

बलेनी पास : टपरियों का ट्रैक, बलेनी बेस कैंप - सल्ली (Baleni Pass : The trek of huts, Baleni Base Camp - Salli)

1 जनवरी 2018
चंद्रेला माता मंदिर से चलकर बलेनी पास के बेस तक पहुंच गये । हम चार लोग एक शानदार टपरी में हैं । यह नए साल की रात है । अगले दिन खीर बनाकर चारों ने गर्मजोशी से नए साल का स्वागत किया । बाहर बर्फ है आगे और भी ज्यादा बर्फ है । दोपहर 2 बजे वापस चलना शुरू किया यह सोचकर की 3-4 बजे तक सल्ली पहुंच जायेंगे । जैसे ही अंदर पैकिंग शुरू हुई वैसे ही बाहर बर्फ गिरने लगी । “हैप्पी न्यू ईयर”

Wednesday, January 10, 2018

बलेनी पास : टपरियों का ट्रैक, सल्ली - बलेनी बेस कैंप (Baleni Pass : The trek of huts, Salli-Base Camp)

30 दिसम्बर 2017
20 दिसम्बर 2017 को ‘प्लान’ पैदा हुआ “घूमने जाना है घूमने जाना है बोलते हुए” । रोना रोकने के लिए इसको बोलना पड़ा कि "तेरी माँ करेरी झील पर है", 25 तक प्लान का झुनझुना ‘सरी जोत’ पर लगे त्रिशूल पर लटक गया (रोना और हगना अभी भी कायम है), 27 को कार्टूनिस्ट साहब ने प्लान को फिर से करेरी लेक में कूदा दिया वो भी डाईपर समेत (मरते मरते बचा), और अंत में 28 को जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही प्लान को “माँ बलेनी” के हवाले कर दिया । स्वाहा: