Friday, September 22, 2017

1877 रू. में 2 कैलाश दर्शन : पोवारी-गुफा (2 Kailash visited in just 1877 rs. : Powari - Gufa)

27 जुलाई 2017
“सतलुज नदी को लगभग 40 फुट ऊँचे टोकरीनुमा झूले से पार करके किन्नर कैलाश यात्रा के आखिरी गाँव ‘तंगलिंग’ में प्रवेश होता है जहां विश्व-प्रसिद्ध किन्नौरी सुनहरी सेबों की झलक दिखाई देती है । कई किमी. ऊँची चढ़ाई चढ़कर आप वहां पहुंचते हो जहां हरे-भरे ऊँचे दरख्तों का अस्तित्व रंग-बिरंगे फूलों की खूबसूरती में विलीन हो जाता है और जो कमी रह जाती है उसे यहाँ से दिखता जोरकांदेन पर्वत (6473 मी.) पूरी कर देता है । अनकही सुन्दरता को समेटे यह यात्रा आपको 4000 मी. से भी ऊपर ले जाती है जहां दर्शन होते हैं स्वर्ग के । स्वागत है धरती के स्वर्ग किन्नर कैलाश में” ।

Sunday, September 17, 2017

1877 रू. में 2 कैलाश दर्शन : ज्यूरी - पोवारी (2 Kailash visited in just 1877 rs. : Jeori - Powari)

26 जुलाई 2017 
“मैं पहले भी हिमालय में रह चुका हूँ, घूम चुका हूँ परन्तु आज सुबह उठकर जैसा महसूस हो रहा है वैसा अतीत में भी हुआ होगा लेकिन आज का एहसास अभी से जुड़ा है, मुझसे जुड़ा है, मेरी संतुष्टि से जुड़ा है । पहले कभी इतना पूर्ण महसूस नहीं हुआ । आज खुद को देख पाने में सक्षम हूँ, सक्षम हूँ इसका स्वाद चख पाने में जो होटो पर डोल रही है । संतुष्टि ही तुम्हारा नाम है मेरे भीतर” ।

Wednesday, September 13, 2017

1877 रू. में 2 कैलाश दर्शन : भीम तलाई – जाओं - ज्यूरी (2 Kailash visited in just 1877 rs : Bhim talai – Jaon - Jeori)

25 जुलाई 2017
“भारतीय हिमालय, ऊंचाई समुन्द्र तल से 3556 मीटर, आप टेंट के भीतर हैं और स्लीपिंग बैग में सो रहे हैं, बाहर तेज बारिश हो रही है, रह-रहकर बादलों के गर्जने की दहाड़ सुनाई दे रही है, टेंट के बाईं तरफ रंग-बिरंगे फूल धरती के सौंदर्य की शोभा बढ़ा रहे हैं और दाईं तरह मीठे पानी के झरने कुदरत की दीवानगी में बह रहे हैं, आपके टेंट के सामने 5000 मीटर ऊँचे विशाल बर्फीले पहाड़ शांत खड़े है ताकि आप उसके आँगन में बिना किसी चिंता के सो सकें” । अगर पहाड़ों में आकर भी आपके साथ ऐसा नहीं हो रहा है तो परेशान मत होना क्योंकि जल्द ही यह होने वाला है ।

Saturday, September 9, 2017

1877 रू. में 2 कैलाश दर्शन : भीम डुआरी - श्रीखंड महादेव – भीम तलाई (2 Kailash visited in just 1877 rupees : Bhim dwar – Shrikhand Mahadev – Bhim talai)

24 जुलाई 2017
दिन में तो लंगर वालों की उदारता देखने को मिली ही ऊपर में रात में उदारता ने गर्मी का रूप ले लिया । मेरा मतलब रात 10 बजे बाहर जब तेज बारिश शुरू हो चुकी थी तब मैं अपने स्लीपिंग बैग में घुस चुका था । अहा...अच्छा लगता है जब गर्मागर्म स्लीपिंग बैग अपने एहसास से आपको मदहोश कर दे और नींद के दरवाजे पर छोड़ दे लेकिन रात में जहाँ तापमान घटना चाहिए था वहीं तेजी से बढ़ना शुरू हो गया । शायद सपने में मुझे इस बात का एहसास हो चुका था कि अगले 30 सेकंड में अगर मैं स्लीपिंग बैग से बाहर नहीं आया तो मौत निश्चित है ।