Friday, June 9, 2017

पराशर झील - जब एडवेंचर सजा बन गया (फोटो स्टोरी, भाग -3), Prashar Lake - When the adventure becomes trouble (Photo Story, Part - 3)


“अगर आपको नींद बहुत अच्छी और गहरी आती है तो समझ लेना आप काफी शारीरिक परिश्रम करते है, और यही कल रात हमारे साथ हुआ । ऑंखें खोलने से पहले कल के चुनौतीपूर्ण दिन को श्रधांजलि दी । बाहर किरणें निकल आई हैं और भीतर उम्मीदों का सूरज । उठते ही तीनों ने जो आपस में बांटी वो थी “सच्ची मुस्कान” । सूरज की किरणों पर फिसलती छोटी, भोली, प्यारी, बस एक “कट्टो मुस्कान” । कुदरत अपनी उपस्थिति की पावन ऊर्जा हमारे नाम कर रही थी । हम तो सिर्फ उसकी ऊर्जा ही अपने नाम कर सके जबकि वो सम्पूर्ण खुद को हमपर लुटाकर हम ही बन बैठी” । सूरज की गर्मी, बर्फ की ठंडक, पहाड़ों की कतार, पेड़ों की रौनक, आज सबकुछ सजीव लग रहा है, आज सब ताजा हो गया है, आज हम जिंदा हो गये हैं” ।

Saturday, June 3, 2017

पराशर झील - जब एडवेंचर सजा बन गया (फोटो स्टोरी, भाग -2), Prashar Lake - When the adventure becomes trouble (Photo Story, Part - 2)

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      मंडी से खड़ी चढ़ाई, लैंड-स्लाइड, बारिश और अब बागी के बस स्टैंड में 2 टैंटों में हम 3 । शाम को पास की एकमात्र दुकान पर जब हमने डिनर किया तभी स्थानियों ने हमें चेतावनी दे दी कि “ऐसे खराब मौसम में आगे जाना खतरनाक होगा” । हम खाते-खाते उनकी चेतावनियाँ सुनते रहे और अब बिना एडवेंचर के वापस जाना हमारे साथ जात्ती होगी । चाय-शॉप में ही हमने मीटिंग की कि “पराशर लेक यहाँ से सिर्फ 18-19 किमी. ही रह गई है अगर कल जल्दी निकले तो ज्यादा-से-ज्यादा झील पर हम 3 घंटे में पहुँच सकते हैं और 1 घंटे में वापस यहाँ आ सकते हैं” । “सारा सामान यहीं छोड़ देंगे ताकि आना-जाना जल्दी और आसान हो सके”, बोलकर मैंने चाय वाले को खाने के पैसे दिए । हम इंसान ही थे लेकिन दुकान में बैठे सभी लोग हमारी बातें सुनकर ऐसे मुंह बना रहे थे जैसे कल हिमाचल सरकार उन्हें हमारे रेस्क्यू पर भेजेगी, वो भी फ्री । आज हमने 30 किमी. साइकिलिंग की, बाकी का सफ़र कल सुबह शुरू होगा चाहे बारिश रुके या नहीं ।